ईश्वर का अस्तित्व


यदि आपको किसी भी धर्म, शास्त्र अथवा प्राचीन महात्माओं के लेख पर विश्वास न हो, तो कम-से-कम एक श्रीमद्भगवद्गीता पर तो जरुर विश्वास करना चाहिए |
यदि '''''''ईश्वर के अस्तित्व '''''में भी आपके मनमें संदेह हो तो वर्तमान समय में आपकी दृष्टि में जगत में जितने श्रेष्ठ पुरुष हैं उन सबमें जो आपको सबसे श्रेष्ठ मान्य हों, उन्हीं के बतलाये हुए मार्गपर कमर कसकर चलना चाहिए |
किसी भी ''''''साधु-महात्मा ''''' या '''''सत्पुरुष '''पर आपका विश्वास न हो, तो आपको यह विचार करना चाहिए कि क्या सारे संसार में हमसे उत्तम कल्याणमार्ग के ज्ञाता कोई नहीं हैं ?
यदि यह कहते हों कि ‘हैं तो सही पर हमको नहीं मिले |’ तो उनकी खोज करनी चाहिए, अथवा यदि यह समझते हों कि ‘ हमसे तो बहुत-से पुरुष श्रेष्ठ हैं परन्तु कल्याणमार्ग के भलीभांति उपदेश करनेवाले पुरुष संसार में बहुत ही थोड़े हैं, जो हैं उनका भी हम-जैसे अश्रद्धालुओं को मिलना कठिन है, और यदि कहीं मिल भी जाते हैं तो पहचानने की योग्यता न होनेके कारण हम उन्हें पहचान नहीं सकते |’
अपनी उन्नति के लिए आपको उत्तरोत्तर विशेष प्रयत्न तो करना ही चाहिए | धृति, क्षमा, शांति, सन्तोष, जप, तप, सत्य, दया, ध्यान और सेवा आदि गुण और कर्म आपके विचार में जो उत्तम प्रतीत हों उनका ग्रहण तथा प्रमाद, आलस्य, निद्रा, विषयासक्ति, झूठ, कपट, चोरी आदि दुर्गुण और दुष्कर्मों का त्याग करना चाहिए |
प्रत्येक कर्म करने से पूर्व सावधानी के साथ यह सोच लेना चाहिए कि मैं जो कुछ कर रहा हूँ वह मेरे लिए यथार्थ लाभदायक है या नहीं और उसमें जहाँ कहीं भी त्रुटि मालूम पड़े, उसका बिना विलम्ब सुधार कर लेना चाहिए |
मनुष्य जन्म बहुत ही दुर्लभ है, लाखों रूपये खर्च करने पर भी जीवन का एक क्षण नहीं मिल सकता | ऐसे मनुष्य-जीवन का समय निद्रा, आलस्य, प्रमाद और अकर्मण्यता में व्यर्थ कदापि नहीं खोना चाहिए |
जो मनुष्य अपने इस अमूल्य समय को बिना सोचे-विचारे बितावेगा, उसे आगे चलकर अवश्य ही पछताना पड़ेगा |
अपनी बुद्धि के अनुसार मनुष्य को अपना समय बड़ी ही सावधानी से परमार्थ काम में लगाना चाहिए जिससे आगे चलकर पश्चात्ताप न करना पड़े |
यह मनुष्य-जीवन बहुत ही महँगे मोल से मिला है
अपने जीवन के बचे हुए समय को बुद्धिमानी के साथ केवल''''' कल्याण'''' के मार्ग में ही लगाना चाहिए |

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