मारकुंडेश्वरजी महादेव का इतिहास

मारकुंडेश्वरजी महादेव, अजारी, सिरोही, राजस्थान   मारकुंडेश्वरजी महादेव मंदिर जो ७वी सदी का है और माँ सरस्वती का मंदिर गुप्त कालीन है ! सिरोहीरोड से आबूरोड हाईवे  मार्ग पर अजारी बस स्टेंड से २ किलोमीटर भीतर  अजारी गाव में मौजूद है और गाव से २ किलोमीटर दूर पर्वतीय नाले के पार वन क्षेत्र से घिरा हुआ सुंदर मारकुंडेश्वरजी महादेव का ७ वी सदी का प्राचीन मंदिर है, प्राक्रतिक छठा व् हरे भरे पेड पौधो व् खजूर क वृक्षों से घिरा  यह मंदिर अपने आप में अनूठा है ! मंदिर के सामने ही पञ्चतत्व जल बहता है , कहते है इस जल में बाण गंगा सूर्य कुंड गया कुंड आदि का भी जल एकत्र  होता  है ! यह जल कभी नही सूखता है , दंत कथा है की इसी गाव के एक भक्त की गंगा के प्रति सिम श्रधा के कारण ही गंगा स्वयं इस गाव में आई थी , अतः इस पानी को गंगाजल ही माना जाता है ! सिरोही के आस पास के लोग मोक्ष प्राप्त होने के लिए इसी कुंड में अस्थि प्रवाहित करते है ! 



                                                     
यहाँ पर माँ सरस्वती की प्रतिमा अति प्राचीन है जो गुप्तकालीन सुंदर काले पत्थर की चमत्कारिक प्रतिमा है, लगभग ४ फुट ऊँचे आकार की माँ सरस्वतीकी ऐसी सुंदर प्रतिमा भरत भर में शायद ही कही होगी ! यही पर राजा कुमारपाल सोलंकी के गुरु हेमचंद्राचार्य ने माँ सरवती की आराधना कर ज्ञान प्राप्त किया था, व यही पर जगद्गुरु शंतिविजयजी ने पञ्च वर्षो तक माँ सरस्वती की साधना कर अथाह ज्ञान प्राप्त किया था , एवं मृत्यु पर विजय पाने वाले महर्षि  मार्कंडेय की भी यह तपो भूमि रही है ! मार्कंडेय की मृत्यु बारह वर्ष की उम्र में  होनी निश्चित थी अतः उन्होंने सोचा मृत्यु से पूर्व का समय तपस्यो में बिता दू अतः वे यहाँ पर आये व् यहाँ के शिव लिंग के पास में तप करने लगे , बारह वर्ष की आयु होने पर जब यमराज उन्हें लेने आये तो मार्कंडेय ने शिव लिंग को कास के पकड़ लिया तब शिव स्वयं प्रकट हुए और यमराज का फंदा अपने त्रिशूल से काट दिया तब से मार्कंडेय अमर हो गये इस लिए इस स्थल को  मारकुंडेश्वरजी भी कहते है यहाँ पर आज भी वो धुनी मौजूद है

 माँ सरस्वती का ऐतिहासिक मंदिर जहाँ पर आते बड़े बड़े कलाकार ,माँ सरस्वती की कृपा से होती है सबकी मनोकामना पूरी,बच्चे पढ़ाई में कमजोर हो तो चढ़ाते है नोटबुक और लाल पेन, और जिनकी जुबान हकलाती है वो चढ़ाते है चांदी की जीभ !! 

बंदर यहाँ भी आपका मन मोह लेंगे यहा गोपालजी मंदिर के पास की बावड़ी से चार प्राचीन शिलालेख प्राप्त हुए है जिसमे परमारों के शासन काल की जानकारी होती है ! इन लेखो में रणसिह परमार के लेख महत्वपूर्ण है ! यहा प्रति वर्ष भाद्रपद सुदी ११ को एवं वैशाखी पूर्णिमा को मेला भरता है जिसमे आस पास के ग्रासियो व् अन्य आदिवासियों की बहोत भीड़ होती है खजूर के वृक्षों से आच्छादित माँ सरस्वती एवं शिवजी का यह सुंदर प्राकृतिक स्थल देखना ना भूले !






SHARE THIS

Author:

Previous Post
Next Post