सोनाणा खेतलाजी जुनी धाम सारंगवास

सोनाणा खेतलाजी  जुनी धाम सारंगवास 




जन-जन आस्था के प्रतीक श्री सोनाणा खेतलाजी के नाम को कौन नहीं जानता। कलयुग में हारे का सहारा, भुले को राह दिखाने वाले एवं दुखियों के कष्ट का निवारण करने वाले श्री खेतलाजी महाराज के दर्शन को दूर-दूर से दर्शन करने एवं अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए दुनिया हर रोज आती है ।
देवो की धरती राजस्थान में अरावली की गोद में देसूरी तहसिल से मात्र 5 किमी. की दूरी पर स्थित इस मन्दिर की शोभा देखते ही बनती है। आज भी जहां प्रकृति अपने स्वरूप में स्थित है। जहां आज भी मोरों की मधुर आवाज कानों में पड़ती है और दिल को सूकून मिलता है। शिव के पांचवे अवतार श्री भैरव के स्वरूप की यहां पूजा होती है। श्री खेतलाजी महाराज को ही दुनियां श्री भैरव, श्री क्षेत्रपालजी के नाम से यहां पूजा करने आती है ।
श्री खेतलाजी महाराज एक अन्य कार्य के लिए विशेष प्रसिद्ध है और वह है-बांझ को बालक देने के लिए। यहां आज तक हजारों बांझों की गोद भराई हुई और उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई । यानि श्री खेतलाजी महाराज ने कईयों को कुलदीपक दियें ।

सबसे बड़ी बात यह की यह मन्दिर आज भी छत्तीस कौम का है। और छतीस कौम के कुलदेवता श्री खेतलाजी है। प्रत्येक  कुल (गौत्र) के अपने कुलदेव और कुल देवी माने गये है। इसका पूरा लेखा-जोखा एक पुस्तक में दर्शाया गया है, जो कि यहां मन्दिर पर प्राप्त की जा सकती है ।
मन्दिर की सुविधाओं के बारे में बात करे तो यहां यात्रियों के लिए ठहरने के लिए धर्मशालाएं, सुविधायुक्त गेस्ट हाउस, भोजनशाला जहां घर के समान शुद्धि से भोजन तैयार किया जाता है, गुलाबों का बाग, एयरकंडीशन गेस्ट हाउस, नहाने धोने की सम्पूर्ण सुविधा, पुछताछ कार्यालय आदि की सम्पूर्ण व्यवस्था है। पूजा सामग्री यहीं पर स्थित दुकानों से वाजिब दाम में प्राप्त की जा सकती है। यहां नित्य लाखों की तादात में कबुतर, मोर, तोते आदि को दाना देने की व्यवस्था है। इसीलिए यहां आज भी हजारों की तादात में मोर देखें जा सकते है। यहां के आस पास के गांव सोनाणा, सारंगवास, आना, शोभावास, काणा, दुदापुरा, विरमपुरा है । खेतलाजी पंहुचने के लिए देसूरी फालना, सादड़ी से बस मिल जाती है। यह नेशनल हाईवे सं. 14 से 62 किमी. की दूरी पर स्थित है। यानि साण्डेराव से फालना होते हुए देसूरी से सोनाणा पंहुच सकते है ।

श्री खेतलाजी महाराज के भोग में मक्की के बाकले और तिल्ली का तेल चढ़ाया जाता है ।
गेंहु की गुगरी और आटे की मातर का भी खेतलाजी के भोग लगता है । आपकी तीन समय आरती होती है ।
वर्ष में एक बार चेत्र सुदी एकम को खेतलाजी का भव्य मेला होता है। इस मेलें में दूर-दूर से भक्तगण दर्शन को आते है, तरह-तरह की कलात्मक गैरो का नृत्य होता है। भक्तगण पैदल संघ लेकर पहुंचते है ।
खेतलाजी की सरहद में जो भी कंुवारी बालिका आती है, विवाह के उपरान्त जोड़े से बाबा के दर्शन को आना पड़ता है और जातदेनी पड़ती है। जिनके कुलदेवता श्री खेतलाजी है, उनके घर में पुत्र प्राप्ति होने पर भी जड़ोले की जात देने के लिए श्री खेतलाजी आना होता है। कई लोगों की मुरादे पुरी होती है तो वे भी पूजा करने आते है।
सोनाणा खेतलाजी में जूनी धाम में खेतलाजी महाराज का स्वरूप नागदेवता का मूर्तिमान स्वरूप भी स्थित है । व्यापक आकार में फैले इस नागदेवता के दर्शन कर लोग अचरज करते है। क्योकि नाग चट्टान से एवं प्राकृतिक निर्मित है ।


माना जाता है कि काशी से श्री खेतलाजी मण्डोर आये। यह बड़ी गादी मानी जाती है। उसके बाद श्री खेतलाजी तीखी मगरी और उसके बाद श्री सोनाणा खेतलाजी पधारे । श्री सोनाणा खेतलाजी आबू पर्वत और पुष्कर राज के बीच स्थित है। इसलिए ऐसा भी माना जाता है कि श्री भैरव अरावली में तप कर रहे हजारों साधुओं की सुरक्षा करते थे और मध्य स्थान होने की वजह से श्री सोनाणा खेतलाजी की गुफा उनका विश्राम स्थल हुआ करती थी। भविष्य में उनका विश्राम स्थल ही उनका स्थाई स्थल हो गया और उनकी यहां पूजा होने लगी ।
कुल मिलाकर श्री सोनाणा खेतलाजी लाखों भक्तो के कुलदेवता तो है ही, यहां आकर भक्तो को शान्ति प्राप्त होती है। यहां की प्राकृतिक छटा भक्तों का मन मोह लेती है । जिसने एकबार दर्शन किया वह बार-बार दर्शन को खींचा चला आएगा ।

सोनाणा खेतलाजी का ये बहोत ही  प्यारा भजन जरुर सुने 

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